श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 10: भीमसेनका राजाके लिये संन्यासका विरोध करते हुए अपने कर्तव्यके ही पालनपर जोर देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.10.5 
भैक्ष्यमेवाचरिष्याम शरीरस्याविमोक्षणात्।
न चेदं दारुणं युद्धमभविष्यन्महीक्षिताम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारी तरह हम भी मरते दम तक भिक्षा मांगकर जीवन निर्वाह करते, तो राजाओं के बीच यह भयंकर युद्ध न होता॥5॥
 
Like you, we too would have lived by begging till we die. Then this terrible war between kings would not have taken place. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)