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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 10: भीमसेनका राजाके लिये संन्यासका विरोध करते हुए अपने कर्तव्यके ही पालनपर जोर देना
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श्लोक 4
श्लोक
12.10.4
यदीमां भवतो बुद्धिं विद्याम वयमीदृशीम्।
शस्त्रं नैव ग्रहीष्यामो न वधिष्याम कंचन॥ ४॥
अनुवाद
यदि हमें पहले पता होता कि तुम्हारे विचार ऐसे हैं, तो हम न तो शस्त्र उठाते और न किसी की हत्या करते ॥4॥
Had we known earlier that your thoughts were like this, we would not have taken up arms nor would we have killed anyone. ॥4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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