Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.10.19: अतः जो क्षात्रधर्म के लिए उत्पन्न हुए हैं, जो क्षात्रधर्म में ही समर्पित हैं और क्षात्रधर्म का आश्रय लेकर अपना जीवन निर्वाह करते हैं, वे क्षत्रिय स्वयं उस क्षात्रधर्म की निन्दा कैसे कर सकते हैं? जिस विधाता ने क्षत्रियों के लिए युद्ध का कर्तव्य निर्धारित किया है, उसकी निन्दा क्यों न करें?॥19॥ | mahabharat अध्याय 12.10: भीमसेनका राजाके लिये संन्यासका विरोध करते हुए अपने कर्तव्यके ही पालनपर जोर देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथं तस्मात् समुत्पन्नास्तन्निष्ठास्तदुपाश्रया:।
तदेव निन्दां भाषेयुर्धाता तत्र न गर्ह्यते॥ १९॥
अनुवाद
अतः जो क्षात्रधर्म के लिए उत्पन्न हुए हैं, जो क्षात्रधर्म में ही समर्पित हैं और क्षात्रधर्म का आश्रय लेकर अपना जीवन निर्वाह करते हैं, वे क्षत्रिय स्वयं उस क्षात्रधर्म की निन्दा कैसे कर सकते हैं? जिस विधाता ने क्षत्रियों के लिए युद्ध का कर्तव्य निर्धारित किया है, उसकी निन्दा क्यों न करें?॥19॥
Therefore, those who were born for Kshatradharma, who are devoted to Kshatradharma and who live their lives by taking shelter of Kshatradharma, how can those Kshatriyas criticize that Kshatradharma themselves? Why not criticize the creator who has prescribed the duty of war for Kshatriyas?॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥