यथा महान्तमध्वानमाशया पुरुष: पतन्।
स निराशो निवर्तेत कर्मैतन्नस्तथोपमम्॥ ११॥
अनुवाद
जिस प्रकार मनुष्य मन में कोई आशा लेकर लंबी दूरी की यात्रा करता है और वहाँ पहुँचकर निराश होकर लौटता है, उसी प्रकार हमारा कार्य भी व्यर्थ सिद्ध हो रहा है ॥11॥
Just as a person travels a long distance with some hope in his mind and on reaching there returns disappointed, our work is also proving futile in the same way. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥