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mahabharat 12.10.10: जैसे कोई विशाल वृक्ष पर बैठा हुआ वहाँ से शहद नीचे लाता है, परन्तु उसे खाने से पहले ही मर जाता है, वैसे ही हमारे प्रयास भी ऐसे ही हैं ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.10: भीमसेनका राजाके लिये संन्यासका विरोध करते हुए अपने कर्तव्यके ही पालनपर जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 10: भीमसेनका राजाके लिये संन्यासका विरोध करते हुए अपने कर्तव्यके ही पालनपर जोर देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.10.10 
यथाऽऽरुह्य महावृक्षमपहृत्य ततो मधु।
अप्राश्य निधनं गच्छेत् कर्मेदं नस्तथोपमम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जैसे कोई विशाल वृक्ष पर बैठा हुआ वहाँ से शहद नीचे लाता है, परन्तु उसे खाने से पहले ही मर जाता है, वैसे ही हमारे प्रयास भी ऐसे ही हैं ॥10॥
 
Just as someone sitting on a huge tree brings down honey from there but dies before he can eat it, our efforts are also similar. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)