श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  12.1.34-35 
तं पुत्रगृद्धिनी भूयो माता पुत्रमथाब्रवीत्॥ ३४॥
भ्रातॄणां स्वस्ति कुर्वीथा येषां स्वस्ति चिकीषर्सि।
एवमुक्त्वा किल पृथा विसृज्योपययौ गृहान्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
तब अपने पुत्रों का कल्याण चाहने वाली माता ने पुनः अपने ज्येष्ठ पुत्र से कहा - ‘पुत्र! तुम जिन चारों भाइयों का कल्याण चाहते हो, उनका कल्याण करो।’ ऐसा कहकर माता कर्ण को छोड़कर घर लौट गईं।
 
Then the mother, who wanted the welfare of her sons, again said to her eldest son - 'Son! Do good to the four brothers whose welfare you want.' Having said this, the mother left Karna and returned home.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas