श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  12.1.25-26h 
न हि तं वेद पार्थोऽपि भ्रातरं श्वेतवाहन:॥ २५॥
नाहं न भीमो न यमौ स त्वस्मान् वेद सुव्रत:।
 
 
अनुवाद
यहाँ तक कि कुन्तीपुत्र श्वेतवाहनधारी अर्जुन भी उन्हें अपना भाई नहीं जानते थे। मैं, भीमसेन, नकुल और सहदेव भी यह बात नहीं जानते थे; किन्तु उत्तम व्रतों का पालन करने वाले कर्ण ने हमें अपना भाई माना।
 
Even Kunti's son, white-vehicled Arjuna did not know him as his brother. I, Bhimasena, Nakula and Sahadeva also did not know this; but Karna, who observed the best vows, knew us as his brother. 25 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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