श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.1.10 
भवता बाहुवीर्येण प्रसादान्माधवस्य च।
जितेयमवनि: कृत्स्ना धर्मेण च युधिष्ठिर॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाराज युधिष्ठिर! आपने अपने बाहुबल, भगवान श्रीकृष्ण की कृपा और धर्म के प्रभाव से इस सम्पूर्ण पृथ्वी को जीत लिया है। 10॥
 
Maharaj Yudhishthir! You have conquered this entire earth with your muscle power, the grace of Lord Krishna and the influence of religion. 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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