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mahabharat 11.9.14: हे कुरुश्रेष्ठ! काल नाना प्रकार के प्राणियों को खींचता है। क्योंकि काल को न तो कोई प्रिय है और न ही कोई द्वेष करने योग्य है॥14॥   |   mahabharat अध्याय 11.9: धृतराष्ट्रका शोकातुर हो जाना और विदुरजीका उन्हें पुन: शोकनिवारणके लिये उपदेश   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 9: धृतराष्ट्रका शोकातुर हो जाना और विदुरजीका उन्हें पुन: शोकनिवारणके लिये उपदेश  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  11.9.14 
काल: कर्षति भूतानि सर्वाणि विविधानि च।
न कालस्य प्रिय: कश्चिन्न द्वेष्य: कुरुसत्तम॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! काल नाना प्रकार के प्राणियों को खींचता है। क्योंकि काल को न तो कोई प्रिय है और न ही कोई द्वेष करने योग्य है॥14॥
 
‘Time pulls all the various creatures. O best of Kurus! For time, neither anyone is dear to it nor anyone is deserving of hatred.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)