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mahabharat 11.9.12: ‘शोक करनेवाला न तो मृतक के साथ जाता है और न स्वयं मरता है। जब संसार की यही स्वाभाविक स्थिति है, तो फिर तुम बार-बार शोक क्यों कर रहे हो?॥12॥   |   mahabharat अध्याय 11.9: धृतराष्ट्रका शोकातुर हो जाना और विदुरजीका उन्हें पुन: शोकनिवारणके लिये उपदेश   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  11.9.12 
न शोचन् मृतमन्वेति न शोचन् म्रियते नर:।
एवं सांसिद्धिके लोके किमर्थमनुशोचसि॥ १२॥
 
 
अनुवाद
‘शोक करनेवाला न तो मृतक के साथ जाता है और न स्वयं मरता है। जब संसार की यही स्वाभाविक स्थिति है, तो फिर तुम बार-बार शोक क्यों कर रहे हो?॥12॥
 
‘The mourner neither goes with the dead nor dies himself. When this is the natural state of the world, then why are you mourning again and again?॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)