श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  11.8.9 
तदिदं व्यसनं प्राप्तं मया भाग्यविपर्ययात्।
तस्यान्तं नाधिगच्छामि ऋते प्राणविमोक्षणात्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
आज भाग्य के फेर से मुझे अपने स्वजनों के नाश का महान दुःख हुआ है। अब मैं प्राण त्यागने के अतिरिक्त किसी अन्य उपाय से इस दुःख को दूर नहीं कर सकता॥9॥
 
‘Today, due to the twists of fate, I have suffered the great sorrow of the destruction of my relatives. Now, I cannot overcome this sorrow by any other means except giving up my life.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)