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श्री महाभारत
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पर्व 11: स्त्री पर्व
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अध्याय 8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना
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श्लोक 53
श्लोक
11.8.53
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं व्यास: सत्यवतीसुत:।
धृतराष्ट्रस्य राजेन्द्र तत्रैवान्तरधीयत॥ ५३॥
अनुवाद
राजेंद्र! धृतराष्ट्र के ये वचन सुनकर सत्यवतीनन्दन व्यास वहीं अन्तर्धान हो गये। 53॥
Rajendra! Hearing these words of Dhritarashtra, Satyavatinandan Vyas disappeared there. 53॥
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि जलप्रदानिकपर्वणि धृतराष्ट्रविशोककरणे अष्टमोऽध्याय:॥ ८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत जलप्रदानिकपर्वमें धृतराष्ट्रके शोकका निवारणविषयक आठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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