श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  11.8.50 
वैशम्पायन उवाच
तच्छ्रुत्वा तस्य वचनं व्यासस्यामिततेजस:।
मुहूर्तं समनुध्यायन् धृतराष्ट्रोऽभ्यभाषत॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! महामना व्यासजी के ये वचन सुनकर राजा धृतराष्ट्र कुछ देर तक सोचते रहे, फिर इस प्रकार बोले -॥50॥
 
Vaishmpayana says: O King! On hearing these words of the illustrious Vyasa, king Dhritarashtra thought over something for a while; then he spoke thus:॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)