vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 11: स्त्री पर्व
»
अध्याय 8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना
»
श्लोक 43
श्लोक
11.8.43
अनतिक्रमणीयो हि विधी राजन् कथंचन।
कृतान्तस्य तु भूतेन स्थावरेण चरेण च॥ ४३॥
अनुवाद
हे राजन! कोई भी जीव या अजीव किसी भी प्रकार से भाग्य या काल के नियमों का उल्लंघन नहीं कर सकता ॥ 43॥
O King! None of the living or non-living creatures can in any way transgress the laws of destiny or time. ॥ 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×