श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 8: व्यासजीका संहारको अवश्यम्भावी बताकर धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  11.8.14 
न तेऽस्त्यविदितं किंचिद् वेदितव्यं परंतप।
अनित्यतां हि मर्त्यानां विजानासि न संशय:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुराज! जो कुछ जानने योग्य है, वह आपसे अज्ञात नहीं है। आप मनुष्य जीवन की अनित्यता को भली-भाँति जानते हैं; इसमें कोई संदेह नहीं है॥14॥
 
O King of enemies! Whatever is worth knowing is not unknown to you. You know very well the impermanence of human life; there is no doubt about it. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)