Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.7.23-24: भरतनंदन! अतः सर्वत्र मैत्रीभाव रखते हुए सदाचार का पालन करना चाहिए। संयम, त्याग और सतर्कता ये तीन घोड़े हैं जो मनुष्य को भगवद्धाम तक ले जाते हैं। जो मनुष्य सदाचार की लगाम धारण करके इन तीन घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले मनरूपी रथ पर सवार होता है, वह मृत्यु के भय को त्यागकर ब्रह्मलोक को जाता है। 23-24 | mahabharat अध्याय 11.7: संसारचक्रका वर्णन और रथके रूपकसे संयम और ज्ञान आदिको मुक्तिका उपाय बताना । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्मान्मैत्रं समास्थाय शीलमापद्य भारत।
दमस्त्यागोऽप्रमादश्च ते त्रयो ब्रह्मणो हया:॥ २३॥
शीलरश्मिसमायुक्त: स्थितो यो मानसे रथे।
त्यक्त्वा मृत्युभयं राजन् ब्रह्मलोकं स गच्छति॥ २४॥
अनुवाद
भरतनंदन! अतः सर्वत्र मैत्रीभाव रखते हुए सदाचार का पालन करना चाहिए। संयम, त्याग और सतर्कता ये तीन घोड़े हैं जो मनुष्य को भगवद्धाम तक ले जाते हैं। जो मनुष्य सदाचार की लगाम धारण करके इन तीन घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले मनरूपी रथ पर सवार होता है, वह मृत्यु के भय को त्यागकर ब्रह्मलोक को जाता है। 23-24
Bharatanandan! Therefore, one should acquire morality while maintaining friendly feelings everywhere. Self-control, renunciation and vigilance are the three horses that take one to the abode of God. The person who holds the reins of morality and rides on the chariot of the mind drawn by these three horses, leaves behind the fear of death and goes to Brahmaloka. 23-24.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥