यस्तान् संयमते बुद्धॺा संयतो न निवर्तते।
ये तु संसारचक्रेऽस्मिंश्चक्रवत् परिवर्तिते॥ १५॥
भ्रममाणा न मुह्यन्ति संसारे न भ्रमन्ति ते।
अनुवाद
परन्तु जो लोग अपनी बुद्धि के द्वारा इन्द्रिय-अश्वों को वश में कर लेते हैं, वे इस संसार में लौटकर नहीं आते। जो लोग इस संसार-चक्र में घूमते हुए भी मोह के प्रभाव में नहीं आते, उन्हें फिर इस संसार में भटकना नहीं पड़ता। ॥15 1/2॥
But those who control the sense-horses with the help of their intellect do not return to this world. Those who do not succumb to the influence of delusion even while revolving in this world-wheel, do not have to wander in this world again. ॥15 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥