Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.6.7-8: हे मनुष्यों के स्वामी! उस वन में वर्णित कुआँ देहधारियों का शरीर है। उसके नीचे रहने वाला विशाल सर्प काल है। वह समस्त प्राणियों का नाश करने वाला और देहधारियों का सर्वस्व हरण करने वाला है। ॥7-8॥ | mahabharat अध्याय 11.6: संसाररूपी वनके रूपकका स्पष्टीकरण । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यस्तत्र कूपो नृपते स तु देह: शरीरिणाम्॥ ७॥
यस्तत्र वसतेऽधस्तान्महाहि: काल एव स:।
अन्तक: सर्वभूतानां देहिनां सर्वहार्यसौ॥ ८॥
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! उस वन में वर्णित कुआँ देहधारियों का शरीर है। उसके नीचे रहने वाला विशाल सर्प काल है। वह समस्त प्राणियों का नाश करने वाला और देहधारियों का सर्वस्व हरण करने वाला है। ॥7-8॥
O Lord of men! The well mentioned in that forest is the body of the embodied beings. The huge serpent that lives below it is Kaal (death to death). He is the destroyer of all living beings and the one who takes away everything of the embodied beings. ॥ 7-8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥