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mahabharat 11.5.12-13h: जैसे विशाल कटहल अपने तने से बंधा हुआ लटका रहता है, उसी प्रकार वह ब्राह्मण पैर ऊपर और सिर नीचे करके कुएँ में लटका रहा। ॥12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 11.5: गहन वनके दृष्टान्तसे संसारके भयंकर स्वरूपका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 5: गहन वनके दृष्टान्तसे संसारके भयंकर स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  11.5.12-13h 
पनसस्य यथा जातं वृन्तबद्धं महाफलम्॥ १२॥
स तथा लम्बते तत्र ह्यूर्ध्वपादो ह्यध:शिरा:।
 
 
अनुवाद
जैसे विशाल कटहल अपने तने से बंधा हुआ लटका रहता है, उसी प्रकार वह ब्राह्मण पैर ऊपर और सिर नीचे करके कुएँ में लटका रहा। ॥12 1/2॥
 
Just as the huge jackfruit hangs tied to its stem, in the same way the Brahmin hung in the well with his feet up and head down. ॥12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)