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mahabharat 11.4.19: इस क्षणभंगुर संसार में जो मनुष्य इस वैदिक उपदेश को प्रत्यक्ष जानकर अथवा किसी से सुनकर जन्म से ही निरन्तर धर्म का पालन करता है, वह परम गति को प्राप्त होता है। 19॥   |   mahabharat अध्याय 11.4: दु:खमय संसारके गहन स्वरूपका वर्णन और उससे छूटनेका उपाय   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 4: दु:खमय संसारके गहन स्वरूपका वर्णन और उससे छूटनेका उपाय  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  11.4.19 
प्रत्यक्षं च परोक्षं च यो निशम्य श्रुतिं त्विमाम्।
अध्रुवे जीवलोकेऽस्मिन् यो धर्ममनुपालयन्।
जन्मप्रभृति वर्तेत प्राप्नुयात् परमां गतिम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इस क्षणभंगुर संसार में जो मनुष्य इस वैदिक उपदेश को प्रत्यक्ष जानकर अथवा किसी से सुनकर जन्म से ही निरन्तर धर्म का पालन करता है, वह परम गति को प्राप्त होता है। 19॥
 
In this transitory world, the person who follows the Dharma continuously since birth, either by knowing this Vedic sermon personally or by hearing it from someone, attains the supreme state. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)