Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 11.3.5-7: जब विद्वान और मूर्ख, धनी और निर्धन श्मशान में जाकर सुखपूर्वक सोते हैं, तब क्या वहाँ उनके नाड़ियों से बंधे और हड्डियों से बने मांसहीन शरीरों को देखकर दूसरे लोग उनमें कोई भेद देख सकते हैं, जिससे वे उनके वंश और रूप की विशेषता जान सकें? फिर भी वे लोग आपस में प्रेम क्यों करते हैं? क्योंकि उनकी बुद्धि धोखा खा गई है। 5-7.   |   mahabharat अध्याय 11.3: विदुरजीका शरीरकी अनित्यता बताते हुए धृतराष्ट्रको शोक त्यागनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 3: विदुरजीका शरीरकी अनित्यता बताते हुए धृतराष्ट्रको शोक त्यागनेके लिये कहना  »  श्लोक 5-7
 
 
श्लोक  11.3.5-7 
यदा प्राज्ञाश्च मूढाश्च धनवन्तोऽथ निर्धना:।
सर्वे पितृवनं प्राप्य स्वपन्ति विगतज्वरा:॥ ५॥
निर्मांसैरस्थिभूयिष्ठैर्गात्रै: स्नायुनिबन्धनै:।
किं विशेषं प्रपश्यन्ति तत्र तेषां परे जना:॥ ६॥
येन प्रत्यवगच्छेयु: कुलरूपविशेषणम्।
कस्मादन्योन्यमिच्छन्ति विप्रलब्धधियो नरा:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जब विद्वान और मूर्ख, धनी और निर्धन श्मशान में जाकर सुखपूर्वक सोते हैं, तब क्या वहाँ उनके नाड़ियों से बंधे और हड्डियों से बने मांसहीन शरीरों को देखकर दूसरे लोग उनमें कोई भेद देख सकते हैं, जिससे वे उनके वंश और रूप की विशेषता जान सकें? फिर भी वे लोग आपस में प्रेम क्यों करते हैं? क्योंकि उनकी बुद्धि धोखा खा गई है। 5-7.
 
When the learned and the foolish, the rich and the poor go to the cremation ground and sleep peacefully, then looking at their fleshless bodies bound by nerves and made up of bones, can other people see any difference in them there, by which they can understand the specialty of their lineage and appearance? Even then why do those people love each other? Because their intellect has been deceived. 5-7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)