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mahabharat 11.3.2: विद्वान पुरुष पाप-संग और इष्ट के वियोग से उत्पन्न मानसिक क्लेश से कैसे छुटकारा पाते हैं? ॥2॥   |   mahabharat अध्याय 11.3: विदुरजीका शरीरकी अनित्यता बताते हुए धृतराष्ट्रको शोक त्यागनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 3: विदुरजीका शरीरकी अनित्यता बताते हुए धृतराष्ट्रको शोक त्यागनेके लिये कहना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  11.3.2 
अनिष्टानां च संसर्गादिष्टानां च विसर्जनात्।
कथं हि मानसैर्दु:खै: प्रमुच्यन्ते तु पण्डिता:॥ २॥
 
 
अनुवाद
विद्वान पुरुष पाप-संग और इष्ट के वियोग से उत्पन्न मानसिक क्लेश से कैसे छुटकारा पाते हैं? ॥2॥
 
How do learned men get rid of the mental distress caused by association with evil and separation from the desired? ॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)