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mahabharat 11.3.17: इस संसार में प्राणी अपने पूर्वजन्मों के कर्मों के अनुसार जीते या मरते हैं। जब संसार की यही स्वाभाविक स्थिति है, तो तुम क्यों शोक कर रहे हो?॥17॥   |   mahabharat अध्याय 11.3: विदुरजीका शरीरकी अनित्यता बताते हुए धृतराष्ट्रको शोक त्यागनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 3: विदुरजीका शरीरकी अनित्यता बताते हुए धृतराष्ट्रको शोक त्यागनेके लिये कहना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  11.3.17 
प्राक्कर्मभिस्तु भूतानि भवन्ति न भवन्ति च।
एवं सांसिद्धिके लोके किमर्थमनुतप्यसे॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में प्राणी अपने पूर्वजन्मों के कर्मों के अनुसार जीते या मरते हैं। जब संसार की यही स्वाभाविक स्थिति है, तो तुम क्यों शोक कर रहे हो?॥17॥
 
Beings live or die in this world according to their deeds of previous births. When this is the natural state of the world, why are you grieving?॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)