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mahabharat 11.3.1: धृतराष्ट्र बोले - हे परम बुद्धिमान विदुर! आपकी उत्तम वाणी सुनकर मेरा शोक दूर हो गया है, तथापि मैं अभी भी आपके और अधिक दार्शनिक वचन सुनने की इच्छा रखता हूँ॥1॥   |   mahabharat अध्याय 11.3: विदुरजीका शरीरकी अनित्यता बताते हुए धृतराष्ट्रको शोक त्यागनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 3: विदुरजीका शरीरकी अनित्यता बताते हुए धृतराष्ट्रको शोक त्यागनेके लिये कहना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  11.3.1 
धृतराष्ट्र उवाच
सुभाषितैर्महाप्राज्ञ शोकोऽयं विगतो मम।
भूय एव तु वाक्यानि श्रोतुमिच्छामि तत्त्वत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - हे परम बुद्धिमान विदुर! आपकी उत्तम वाणी सुनकर मेरा शोक दूर हो गया है, तथापि मैं अभी भी आपके और अधिक दार्शनिक वचन सुनने की इच्छा रखता हूँ॥1॥
 
Dhritarashtra said - O most intelligent Vidur! My grief has gone away after listening to your excellent speech, however, I still wish to hear more of your philosophical words.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)