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श्लोक 11.27.6-7h  |
तत: कुन्ती महाराज सहसा शोककर्शिता॥ ६॥
रुदती मन्दया वाचा पुत्रान् वचनमब्रवीत्। |
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| अनुवाद |
| महाराज! तत्पश्चात कुन्तीदेवी सहसा शोक से विह्वल हो गयीं और रोने लगीं और धीमे स्वर में अपने पुत्रों से कहने लगीं - 6 1/2॥ |
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| Maharaj! Thereafter, Kuntidevi suddenly became overcome with grief and started crying and said to her sons in a low voice - 6 1/2॥ |
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