Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 11.27.4-5h: धर्मात्मा पुरुषों ने अपने शुभचिंतक मित्रों के लिए भी जल अर्पण का कार्य किया। जब वीर योद्धाओं की पत्नियाँ उनके लिए जल अर्पण कर रही थीं, तब गंगाजी के जल के प्रवेश के लिए एक सुंदर मार्ग बन गया और गंगा नदी की चौड़ाई और अधिक हो गई।   |   mahabharat अध्याय 11.27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  11.27.4-5h 
सुहृदां चापि धर्मज्ञा: प्रचक्रु: सलिलक्रिया:।
उदके क्रियमाणे तु वीराणां वीरपत्निभि:॥ ४॥
सूपतीर्था भवद्‍गङ्गा भूयो विप्रससार च।
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा पुरुषों ने अपने शुभचिंतक मित्रों के लिए भी जल अर्पण का कार्य किया। जब वीर योद्धाओं की पत्नियाँ उनके लिए जल अर्पण कर रही थीं, तब गंगाजी के जल के प्रवेश के लिए एक सुंदर मार्ग बन गया और गंगा नदी की चौड़ाई और अधिक हो गई।
 
The religious men also performed the task of offering water oblations for their well wishing friends. When the wives of the brave warriors were offering water oblations for them, a beautiful path was formed for the water of Gangaji to enter and the width of the river Ganga became wider. 4 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)