श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  11.27.30 
इत्युक्त्वा स तु गङ्गाया उत्तताराकुलेन्द्रिय:।
भ्रातृभि: सहित: सर्वैर्गङ्गातीरमुपेयिवान्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर राजा युधिष्ठिर व्याकुल होकर अपने सभी भाइयों के साथ गंगा के जल से बाहर निकलकर तट पर आ गए।
 
Saying this, King Yudhishthira, his senses agitated, emerged from the waters of the Ganga and came to the bank along with all his brothers.
 
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि श्राद्धपर्वणि कर्णगूढजत्वकथने सप्तविंशोऽध्याय:॥ २७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत श्राद्धपर्वमें कर्णके जन्मके गूढ़ रहस्यका कथनविषयक सत्ताईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २७॥

॥ स्त्रीपर्व सम्पूर्णम्॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)