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mahabharat 11.27.29: तत्पश्चात् उसने कहा, 'इस रहस्य को न जानने के कारण मुझ पापी ने अपने बड़े भाई को मरवा डाला; इसलिए आज से स्त्रियों के हृदय में कोई रहस्य छिपा नहीं रहेगा।'   |   mahabharat अध्याय 11.27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  11.27.29 
पापेनासौ मया श्रेष्ठो भ्राता ज्ञातिर्निपातित:।
अतो मनसि यद् गुह्यं स्त्रीणां तन्न भविष्यति॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उसने कहा, 'इस रहस्य को न जानने के कारण मुझ पापी ने अपने बड़े भाई को मरवा डाला; इसलिए आज से स्त्रियों के हृदय में कोई रहस्य छिपा नहीं रहेगा।'
 
Thereafter he said, 'Due to not knowing this secret, I, a sinner, got my elder brother killed; hence from today no secret will remain hidden in the hearts of women.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)