श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  11.27.21-22h 
अहो भवत्या मन्त्रस्य गूहनेन वयं हता:॥ २१॥
निधनेन हि कर्णस्य पीडितास्तु सबान्धवा:।
 
 
अनुवाद
हाय! तुमने यह गहरा रहस्य छिपाकर हमें मार डाला। कर्ण की मृत्यु से हमें और हमारे भाइयों को बहुत दुःख हो रहा है।'
 
‘Oh! You killed us by hiding this deep secret. Karna's death is causing us great pain along with our brothers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)