श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  11.27.17-18h 
यस्य बाहुप्रतापेन तापिता: सर्वतो वयम्॥ १७॥
तमग्निमिव वस्त्रेण कथं छादितवत्यसि।
 
 
अनुवाद
जिसकी भुजाओं के बल ने हमें सब ओर से पीड़ा दी थी, उसे तुमने अब तक कैसे छिपाकर रखा, जैसे अग्नि को वस्त्र में छिपाकर रखा जाता है?॥17 1/2॥
 
'How did you keep hidden till now the one whose arms' might had tormented us from all sides, like a fire covered in a cloth?॥ 17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)