Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 11.27.14-15h: तत्पश्चात् वीर पुरुषसिंह कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर ने सर्प के समान लम्बी साँस खींचते हुए अपनी माता से कहा -   |   mahabharat अध्याय 11.27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 27: सभी स्त्री-पुरुषोंका अपने मरे हुए सम्बन्धियोंको जलांजलि देना, कुन्तीका अपने गर्भसे कर्णके जन्म होनेका रहस्य प्रकट करना तथा युधिष्ठिरका कर्णके लिये शोक प्रकट करते हुए उनका प्रेतकृत्य सम्पन्न करना और स्त्रियोंके मनमें रहस्यकी बात न छिपनेका शाप देना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  11.27.14-15h 
तत: स पुरुषव्याघ्र: कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:॥ १४॥
उवाच मातरं वीरो नि:श्वसन्निव पन्नग:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वीर पुरुषसिंह कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर ने सर्प के समान लम्बी साँस खींचते हुए अपनी माता से कहा -
 
Thereafter Yudhishthir, son of the brave Purushasingh Kunti, while drawing a long breath like a snake, said to his mother -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)