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mahabharat 11.26.42-43: इसके बाद उन्होंने विभिन्न देशों से आये हुए तथा वहाँ मरे हुए सभी अनाथों के शवों को मँगवाया और उनके हजारों ढेर बनवाये। फिर विदुर जी ने राजा की आज्ञा से उन सभी का दाह-संस्कार घी और तेल में भीगी हुई लकड़ियों से स्थिरचित्त लोगों की सहायता से चिता बनवाकर करवाया।   |   mahabharat अध्याय 11.26: प्राप्त अनुस्मृतिविद्या और दिव्यदृष्टिके प्रभावसे युधिष्ठिरका महाभारतयुद्धमें मारे गये लोगोंकी संख्या और गतिका वर्णन तथा युधिष्ठिरकी आज्ञासे सबका दाह-संस्कार   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 26: प्राप्त अनुस्मृतिविद्या और दिव्यदृष्टिके प्रभावसे युधिष्ठिरका महाभारतयुद्धमें मारे गये लोगोंकी संख्या और गतिका वर्णन तथा युधिष्ठिरकी आज्ञासे सबका दाह-संस्कार  »  श्लोक 42-43
 
 
श्लोक  11.26.42-43 
ये चाप्यनाथास्तत्रासन् नानादेशसमागता:।
तांश्च सर्वान् समानाय्य राशीन् कृत्वा सहस्रश:॥ ४२॥
चित्वा दारुभिरव्यग्रै: प्रभूतै: स्नेहपाचितै:।
दाहयामास तान् सर्वान् विदुरो राजशासनात्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद उन्होंने विभिन्न देशों से आये हुए तथा वहाँ मरे हुए सभी अनाथों के शवों को मँगवाया और उनके हजारों ढेर बनवाये। फिर विदुर जी ने राजा की आज्ञा से उन सभी का दाह-संस्कार घी और तेल में भीगी हुई लकड़ियों से स्थिरचित्त लोगों की सहायता से चिता बनवाकर करवाया।
 
After this, he called for the bodies of all the orphans who had come from various countries and had died there and made thousands of heaps of them. Then, Vidur ji got all of them cremated as per the king's orders by making a pyre with the help of people with steady minds using a lot of wood soaked in ghee and oil.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)