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श्री महाभारत
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पर्व 11: स्त्री पर्व
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श्लोक 41
श्लोक
11.26.41
ते विधूमा: प्रदीप्ताश्च दीप्यमानाश्च पावका:।
नभसीवान्वदृश्यन्त ग्रहास्तन्वभ्रसंवृता:॥ ४१॥
अनुवाद
उस समय वह जलती हुई चिता, धुआँ छोड़ती हुई, आकाश में सुन्दर बादलों से आच्छादित ग्रहों के समान प्रतीत हो रही थी ॥ 41॥
At that time the blazing and burning pyre, with little smoke, looked like planets covered by fine clouds in the sky. ॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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