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mahabharat 11.26.41: उस समय वह जलती हुई चिता, धुआँ छोड़ती हुई, आकाश में सुन्दर बादलों से आच्छादित ग्रहों के समान प्रतीत हो रही थी ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 11.26: प्राप्त अनुस्मृतिविद्या और दिव्यदृष्टिके प्रभावसे युधिष्ठिरका महाभारतयुद्धमें मारे गये लोगोंकी संख्या और गतिका वर्णन तथा युधिष्ठिरकी आज्ञासे सबका दाह-संस्कार   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 26: प्राप्त अनुस्मृतिविद्या और दिव्यदृष्टिके प्रभावसे युधिष्ठिरका महाभारतयुद्धमें मारे गये लोगोंकी संख्या और गतिका वर्णन तथा युधिष्ठिरकी आज्ञासे सबका दाह-संस्कार  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  11.26.41 
ते विधूमा: प्रदीप्ताश्च दीप्यमानाश्च पावका:।
नभसीवान्वदृश्यन्त ग्रहास्तन्वभ्रसंवृता:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
उस समय वह जलती हुई चिता, धुआँ छोड़ती हुई, आकाश में सुन्दर बादलों से आच्छादित ग्रहों के समान प्रतीत हो रही थी ॥ 41॥
 
At that time the blazing and burning pyre, with little smoke, looked like planets covered by fine clouds in the sky. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)