Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.26.4: यदि कोई मनुष्य किसी मृत स्वजन, नष्ट हुई वस्तु अथवा भूतकाल की किसी वस्तु के लिए शोक करता है, तो वह एक दुःख से दूसरे दुःख का भागी बन जाता है; इस प्रकार उसे दो विपत्तियाँ प्राप्त होती हैं ॥4॥ | mahabharat अध्याय 11.26: प्राप्त अनुस्मृतिविद्या और दिव्यदृष्टिके प्रभावसे युधिष्ठिरका महाभारतयुद्धमें मारे गये लोगोंकी संख्या और गतिका वर्णन तथा युधिष्ठिरकी आज्ञासे सबका दाह-संस्कार । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मृतं वा यदि वा नष्टं योऽतीतमनुशोचति।
दु:खेन लभते दु:खं द्वावनर्थौ प्रपद्यते॥ ४॥
अनुवाद
यदि कोई मनुष्य किसी मृत स्वजन, नष्ट हुई वस्तु अथवा भूतकाल की किसी वस्तु के लिए शोक करता है, तो वह एक दुःख से दूसरे दुःख का भागी बन जाता है; इस प्रकार उसे दो विपत्तियाँ प्राप्त होती हैं ॥4॥
If a person mourns for a dead relative, a destroyed object, or a thing of the past, then from one sorrow he becomes a part of another sorrow; thus he incurs two calamities. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥