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mahabharat 11.26.2-3: आपका पुत्र दुर्योधन दुष्टात्मा, ईर्ष्यालु, द्वेषी और अत्यन्त अभिमानी था। वह पापकर्मों में प्रवृत्त, क्रूर, शत्रुता का प्रतीक और बड़ों की आज्ञा का उल्लंघन करने वाला था। उसे नेता बनाकर आपने जो अपराध किया है, क्या वह आपको उचित लगता है? आप अपने कर्मों का दोष यहाँ मुझ पर कैसे मढ़ना चाहते हैं?॥2-3॥   |   mahabharat अध्याय 11.26: प्राप्त अनुस्मृतिविद्या और दिव्यदृष्टिके प्रभावसे युधिष्ठिरका महाभारतयुद्धमें मारे गये लोगोंकी संख्या और गतिका वर्णन तथा युधिष्ठिरकी आज्ञासे सबका दाह-संस्कार   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  11.26.2-3 
यत् त्वं पुत्रं दुरात्मानमीर्षुमत्यन्तमानिनम्।
दुर्योधनं पुरस्कृत्य दुष्कृतं साधु मन्यसे॥ २॥
निष्ठुरं वैरपुरुषं वृद्धानां शासनातिगम्।
कथमात्मकृतं दोषं मय्याधातुमिहेच्छसि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
आपका पुत्र दुर्योधन दुष्टात्मा, ईर्ष्यालु, द्वेषी और अत्यन्त अभिमानी था। वह पापकर्मों में प्रवृत्त, क्रूर, शत्रुता का प्रतीक और बड़ों की आज्ञा का उल्लंघन करने वाला था। उसे नेता बनाकर आपने जो अपराध किया है, क्या वह आपको उचित लगता है? आप अपने कर्मों का दोष यहाँ मुझ पर कैसे मढ़ना चाहते हैं?॥2-3॥
 
Your son Duryodhan was a wicked soul, jealous and envious of others and extremely arrogant. He was prone to evil deeds, cruel, the embodiment of enmity and disobeyed the orders of elders. Do you think the crime you have committed by making him a leader is right? How do you want to put the blame of your own doing on me here?॥2-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)