vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 11: स्त्री पर्व
»
अध्याय 26: प्राप्त अनुस्मृतिविद्या और दिव्यदृष्टिके प्रभावसे युधिष्ठिरका महाभारतयुद्धमें मारे गये लोगोंकी संख्या और गतिका वर्णन तथा युधिष्ठिरकी आज्ञासे सबका दाह-संस्कार
»
श्लोक 13
श्लोक
11.26.13
ये त्वहृष्टेन मनसा मर्तव्यमिति भारत।
युध्यमाना हता: संख्ये गन्धर्वै: सह संगता:॥ १३॥
अनुवाद
हे भारत! जो लोग दुःखी मन से मरने का निश्चय कर चुके हैं और युद्धभूमि में लड़ते हुए मारे गए हैं, वे गन्धर्वों में सम्मिलित हो गए हैं॥13॥
O Bharata! Those who have decided to die with an unhappy mind and have been killed fighting in the battle-field, have joined the Gandharvas.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×