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mahabharat 11.26.12: युधिष्ठिर ने कहा- जिन्होंने इस महासमर में बड़े हर्ष और उत्साह के साथ अपने शरीर का त्याग किया है, वे सत्यनिष्ठ और वीर देवराज इन्द्र के समान लोकों में चले गये हैं।   |   mahabharat अध्याय 11.26: प्राप्त अनुस्मृतिविद्या और दिव्यदृष्टिके प्रभावसे युधिष्ठिरका महाभारतयुद्धमें मारे गये लोगोंकी संख्या और गतिका वर्णन तथा युधिष्ठिरकी आज्ञासे सबका दाह-संस्कार   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 26: प्राप्त अनुस्मृतिविद्या और दिव्यदृष्टिके प्रभावसे युधिष्ठिरका महाभारतयुद्धमें मारे गये लोगोंकी संख्या और गतिका वर्णन तथा युधिष्ठिरकी आज्ञासे सबका दाह-संस्कार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  11.26.12 
युधिष्ठिर उवाच
यैर्हुतानि शरीराणि हृष्टै: परमसंयुगे।
देवराजसमाँल्लोकान् गतास्ते सत्यविक्रमा:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा- जिन्होंने इस महासमर में बड़े हर्ष और उत्साह के साथ अपने शरीर का त्याग किया है, वे सत्यनिष्ठ और वीर देवराज इन्द्र के समान लोकों में चले गये हैं।
 
Yudhishthir said - Those who have sacrificed their bodies with great joy and enthusiasm in this great battle, have gone to the worlds like the true and brave Devraj Indra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)