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mahabharat 11.25.7: जनार्दन! उधर मगध के राजा जयत्सेन अपनी पत्नियों से घिरे हुए लेटे हुए हैं, जो अत्यंत व्याकुल होकर रो रही हैं।   |   mahabharat अध्याय 11.25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  11.25.7 
मागधानामधिपतिं जयत्सेनं जनार्दन।
आवार्य सर्वत: पत्न्य: प्ररुदत्य: सुविह्वला:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जनार्दन! उधर मगध के राजा जयत्सेन अपनी पत्नियों से घिरे हुए लेटे हुए हैं, जो अत्यंत व्याकुल होकर रो रही हैं।
 
Janardan! On the other side, King Jayatsen of Magadha is lying there, surrounded by his wives who are extremely distraught and crying profusely.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)