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mahabharat 11.25.49-50h: हे शुभ! मेरे सिवा कोई भी ऐसा नहीं है जो वृष्णि वंश का नाश कर सके। यादव अन्य मनुष्यों के लिए तथा देवताओं और दानवों के लिए भी अजेय हैं; इसलिए वे आपस में लड़कर नष्ट हो जाएँगे।॥49 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 11.25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना  »  श्लोक 49-50h
 
 
श्लोक  11.25.49-50h 
संहर्ता वृष्णिचक्रस्य नान्यो मद् विद्यते शुभे।
अवध्यास्ते नरैरन्यैरपि वा देवदानवै:॥ ४९॥
परस्परकृतं नाशमत: प्राप्स्यन्ति यादवा:।
 
 
अनुवाद
हे शुभ! मेरे सिवा कोई भी ऐसा नहीं है जो वृष्णि वंश का नाश कर सके। यादव अन्य मनुष्यों के लिए तथा देवताओं और दानवों के लिए भी अजेय हैं; इसलिए वे आपस में लड़कर नष्ट हो जाएँगे।॥49 1/2॥
 
'O Shubh! There is no one except me who can destroy the Vrishni clan. The Yadavas are invincible for other men as well as for the gods and demons; therefore they will fight among themselves and perish.'॥ 49 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)