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mahabharat 11.25.48: क्षत्राणी! मैं जानता हूँ कि ऐसा ही होगा। तुम तो वही कर रही हो जो पहले हो चुका है। इसमें कोई संदेह नहीं कि वृष्णिवंशी यादवों का भगवान विनाश करेंगे।'   |   mahabharat अध्याय 11.25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  11.25.48 
जानेऽहमेतदप्येवं चीर्णं चरसि क्षत्रिये।
दैवादेव विनश्यन्ति वृष्णयो नात्र संशय:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
क्षत्राणी! मैं जानता हूँ कि ऐसा ही होगा। तुम तो वही कर रही हो जो पहले हो चुका है। इसमें कोई संदेह नहीं कि वृष्णिवंशी यादवों का भगवान विनाश करेंगे।'
 
‘Kshatrani! I know that this is going to happen. You are just doing what has already been done. There is no doubt that the Yadavas of Vrishni clan will be destroyed by God. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)