Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.25.3-4h: वह कहती है - 'हे प्रिये! ये वही सुन्दर हथेलियों और अंगुलियों वाली तथा वृत्त के समान मोटी भुजाएँ हैं, जिनमें तुम मुझे आलिंगन करते थे और उस अवस्था में मुझे जो सुख मिलता था, वह पहले कभी मुझसे दूर नहीं हुआ था। जनेश्वर! अब तुम्हारे बिना मेरा क्या होगा?'॥3 1/2॥ | mahabharat अध्याय 11.25: अन्यान्य वीरोंको मरा हुआ देखकर गान्धारीका शोकातुर होकर विलाप करना और क्रोधपूर्वक श्रीकृष्णको यदुवंशविनाशविषयक शाप देना । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह कहती है - 'हे प्रिये! ये वही सुन्दर हथेलियों और अंगुलियों वाली तथा वृत्त के समान मोटी भुजाएँ हैं, जिनमें तुम मुझे आलिंगन करते थे और उस अवस्था में मुझे जो सुख मिलता था, वह पहले कभी मुझसे दूर नहीं हुआ था। जनेश्वर! अब तुम्हारे बिना मेरा क्या होगा?'॥3 1/2॥
She says, 'My dear! These are the same arms with beautiful palms and fingers and as thick as a circle, in which you used to embrace me and the happiness I used to get in that state had never left me before. Janeshwar! What will happen to me now without you?'॥ 3 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥