Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.24.6: महाराज! यह तो सौभाग्य ही है कि आप इस रणभूमि में अपनी पुत्रवधुओं का वह भयंकर विलाप नहीं सुन रहे हैं, जो समुद्र तट पर सारसों के विलाप के समान है। | mahabharat अध्याय 11.24: भूरिश्रवाके पास उसकी पत्नियोंका विलाप, उन सबको तथा शकुनिको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख शोेकोद्गार । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दिष्टॺा स्नुषाणामाक्रन्दे घोरं विलपितं बहु।
न शृणोषि महाराज सारसीनामिवार्णवे॥ ६॥
अनुवाद
महाराज! यह तो सौभाग्य ही है कि आप इस रणभूमि में अपनी पुत्रवधुओं का वह भयंकर विलाप नहीं सुन रहे हैं, जो समुद्र तट पर सारसों के विलाप के समान है।
'Maharaj! It is only due to good fortune that you are not hearing the horrific wailings of your daughters-in-law in this battlefield, which are like the wailing of cranes on the seashore.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥