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mahabharat 11.24.3: उधर भूरिश्रवा की पतिव्रता और पतिव्रता माता शोक में डूबी हुई मानो अपने पति को सान्त्वना देती हुई कहती है -॥3॥   |   mahabharat अध्याय 11.24: भूरिश्रवाके पास उसकी पत्नियोंका विलाप, उन सबको तथा शकुनिको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख शोेकोद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 24: भूरिश्रवाके पास उसकी पत्नियोंका विलाप, उन सबको तथा शकुनिको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख शोेकोद्‍गार  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  11.24.3 
असौ हि भूरिश्रवसो माता शोकपरिप्लुता।
आश्वासयति भर्तारं सोमदत्तमनिन्दिता॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उधर भूरिश्रवा की पतिव्रता और पतिव्रता माता शोक में डूबी हुई मानो अपने पति को सान्त्वना देती हुई कहती है -॥3॥
 
On the other hand, Bhurishrava's chaste and virtuous mother, immersed in grief, as if reassuring her husband, says -॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)