श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 24: भूरिश्रवाके पास उसकी पत्नियोंका विलाप, उन सबको तथा शकुनिको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख शोेकोद्‍गार  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  11.24.25 
य: स्वरूपाणि कुरुते शतशोऽथ सहस्रश:।
तस्य मायाविनो माया दग्धा: पाण्डवतेजसा॥ २५॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुपुत्र सहदेव के तेज से उस मायावी के सारे भ्रम नष्ट हो गये, जो अपने ही सैकड़ों और हजारों रूप रचता था।
 
All the illusions of that illusionist who used to create hundreds and thousands of forms of himself were burnt by the brilliance of Sahadeva, son of Pandu. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)