श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 24: भूरिश्रवाके पास उसकी पत्नियोंका विलाप, उन सबको तथा शकुनिको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख शोेकोद्‍गार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  11.24.21 
किं नु वक्ष्यसि संसत्सु कथासु च जनार्दन।
अर्जुनस्य महत् कर्म स्वयं वा स किरीटभृत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जनार्दन! आप सज्जनों की सभा में अर्जुन के इस महान् कार्य का वार्तालाप के प्रसंग में किस प्रकार वर्णन करेंगे? अथवा स्वयं किरीटधारी अर्जुन इस जघन्य कर्म की चर्चा किस प्रकार करेंगे?॥21॥
 
'Janardan! How will you describe Arjuna's great deed in the assembly of noble men, in the context of conversation? Or how will the crown-wearing Arjuna himself discuss this heinous deed?'॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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