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श्लोक 11.24.21  |
किं नु वक्ष्यसि संसत्सु कथासु च जनार्दन।
अर्जुनस्य महत् कर्म स्वयं वा स किरीटभृत्॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| जनार्दन! आप सज्जनों की सभा में अर्जुन के इस महान् कार्य का वार्तालाप के प्रसंग में किस प्रकार वर्णन करेंगे? अथवा स्वयं किरीटधारी अर्जुन इस जघन्य कर्म की चर्चा किस प्रकार करेंगे?॥21॥ |
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| 'Janardan! How will you describe Arjuna's great deed in the assembly of noble men, in the context of conversation? Or how will the crown-wearing Arjuna himself discuss this heinous deed?'॥ 21॥ |
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