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श्री महाभारत
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पर्व 11: स्त्री पर्व
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अध्याय 24: भूरिश्रवाके पास उसकी पत्नियोंका विलाप, उन सबको तथा शकुनिको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख शोेकोद्गार
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श्लोक 17
श्लोक
11.24.17
भार्या यूपध्वजस्यैषा करसम्मितमध्यमा।
कृत्वोत्सङ्गे भुजं भर्तु: कृपणं परिदेवति॥ १७॥
अनुवाद
श्री कृष्ण! देखो, युपध्वज की यह क्षीण कमर वाली पत्नी अपने पति की कटी हुई भुजा को गोद में लिए हुए करुण विलाप कर रही है॥17॥
Sri Krishna! Look, this thin-waisted wife of Yupadhwaj is lamenting pitifully holding her husband's severed arm in her lap. ॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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