श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 24: भूरिश्रवाके पास उसकी पत्नियोंका विलाप, उन सबको तथा शकुनिको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख शोेकोद्‍गार  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  11.24.15-16 
एको द्वाभ्यां हत: शेषे त्वमधर्मेण धार्मिक।
किं नु वक्ष्यति वै सत्सु गोष्ठीषु च सभासु च॥ १५॥
अपुण्यमयशस्यं च कर्मेदं सात्यकि: स्वयम्।
इति यूपध्वजस्यैता: स्त्रिय: क्रोशन्ति माधव॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे पुण्यात्मा महापुरुष! दो महारथियों द्वारा अन्यायपूर्वक मारे जाने पर आप ही युद्धभूमि में सो रहे हैं। सात्यकि अपने इस कलंकित करने वाले पापकर्म का वर्णन पुण्यात्मा पुरुषों की सभाओं में अपने मुख से किस प्रकार करेंगे? माधव! इस प्रकार युपध्वज की ये पत्नियाँ सात्यकि को शाप दे रही हैं॥15-16॥
 
'O great man of virtue! You alone are sleeping on the battlefield after being killed unjustly by two great warriors. How will Satyaki describe this sinful act, which has brought disgrace upon himself, with his own mouth in the assemblies and meetings of virtuous men?' Madhava! In this way these wives of Yupadhwaj are cursing Satyaki.॥ 15-16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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