श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 24: भूरिश्रवाके पास उसकी पत्नियोंका विलाप, उन सबको तथा शकुनिको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख शोेकोद्‍गार  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  11.24.10 
दिष्टॺा तत् काञ्चनं छत्रं यूपकेतोर्महात्मन:।
विनिकीर्णं रथोपस्थे सौमदत्तेर्न पश्यसि॥ १०॥
 
 
अनुवाद
सौभाग्यवश आप अपने महामनस्वी पुत्र युपध्वज भूरिश्रवा के रथ पर रखे हुए स्वर्णमय छत्र को टुकड़े-टुकड़े होकर गिरते हुए नहीं देख पा रहे हैं।’ 10॥
 
'Fortunately, you are not able to see the golden umbrella of your great-minded son Yupadhwaj Bhurishrava falling in pieces on his chariot.' 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)