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mahabharat 11.23.2: पुरुषोत्तम! वही महाबली मद्रराज शल्य जो सदैव आपसे सर्वत्र प्रतिस्पर्धा करते थे, यहाँ मारे गए हैं और चिर निद्रा में सो रहे हैं॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 11.23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 23: शल्य, भगदत्त, भीष्म और द्रोणको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख गान्धारीका विलाप  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  11.23.2 
यस्त्वया स्पर्धते नित्यं सर्वत्र पुरुषर्षभ।
स एष निहत: शेते मद्रराजो महाबल:॥ २॥
 
 
अनुवाद
पुरुषोत्तम! वही महाबली मद्रराज शल्य जो सदैव आपसे सर्वत्र प्रतिस्पर्धा करते थे, यहाँ मारे गए हैं और चिर निद्रा में सो रहे हैं॥ 2॥
 
Purushottama! The same mighty Madra king Shalya who used to compete with you everywhere and always, has been killed here and is sleeping in eternal sleep.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)