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mahabharat 11.22.17: जिस वीर ने अपने पुत्र की रक्षा करने के लिए आतुर समस्त पाण्डवों को अकेले ही रोक दिया था, वह अनेक सेनाओं का संहार करके स्वयं भी वीरगति को प्राप्त हुआ ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 11.22: अपनी-अपनी स्त्रियोंसे घिरे हुए अवन्ती-नरेश और जयद्रथको देखकर तथा दु:शलापर दृष्टिपात करके गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 22: अपनी-अपनी स्त्रियोंसे घिरे हुए अवन्ती-नरेश और जयद्रथको देखकर तथा दु:शलापर दृष्टिपात करके गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  11.22.17 
वारयामास य: सर्वान् पाण्डवान् पुत्रगृद्धिन:।
स हत्वा विपुला: सेना: स्वयं मृत्युवशं गत:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जिस वीर ने अपने पुत्र की रक्षा करने के लिए आतुर समस्त पाण्डवों को अकेले ही रोक दिया था, वह अनेक सेनाओं का संहार करके स्वयं भी वीरगति को प्राप्त हुआ ॥17॥
 
The brave man who single-handedly stopped all the Pandavas who wanted to save his son, after killing several armies himself succumbed to death. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)